February 4, 2026
गांधी जयंती 2025: महात्मा गांधी के आदर्श और आज का भारत | DesiRadar
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गांधी जयंती 2025: महात्मा गांधी के आदर्श और आज का भारत

प्रकाशित: 2 अक्टूबर 2025लेख: DesiRadar Editorial
मुख्य बिंदु
  • गांधी जयंती हर साल 2 अक्टूबर को मनाई जाती है।
  • गांधीजी के प्रमुख सिद्धांत: अहिंसा, सत्याग्रह और सरल जीवन।
  • आज भारत उनके आदर्शों को आंशिक रूप से मानता है लेकिन कई जगह दूर भी हो गया है।

परिचय

हर साल 2 अक्टूबर को भारत गांधी जयंती मनाता है, जो महात्मा गांधी के जन्मदिन की स्मृति में होती है। यह दिन न केवल एक राष्ट्रीय अवकाश है बल्कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा इसे अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस भी घोषित किया गया है। गांधीजी को राष्ट्रपिता कहा जाता है और उनका जीवन संघर्ष और सिद्धांत पूरे विश्व के लिए प्रेरणा बने।

महात्मा गांधी का जीवन परिचय

महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। उन्होंने लंदन से कानून की पढ़ाई की और दक्षिण अफ्रीका में वकालत करते हुए रंगभेद का सामना किया। वहीं से उनके भीतर सत्याग्रह और अहिंसा की अवधारणा विकसित हुई। भारत लौटकर उन्होंने असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा और भारत छोड़ो आंदोलन जैसे ऐतिहासिक अभियानों का नेतृत्व किया।

गांधीजी के प्रमुख विचार

  • अहिंसा: किसी भी संघर्ष को बिना हिंसा के हल करने का सिद्धांत।
  • सत्याग्रह: सत्य के लिए संघर्ष, जो न्याय की प्राप्ति का साधन है।
  • सादगी और स्वदेशी: खादी पहनना और आत्मनिर्भरता पर जोर।
  • समानता: जातिवाद और अस्पृश्यता का विरोध।

आज के भारत में गांधीजी की प्रासंगिकता

भारत ने स्वतंत्रता के बाद संविधान और लोकतंत्र के माध्यम से गांधीजी के आदर्शों को अपनाने की कोशिश की। लेकिन आज भी हिंसा, भ्रष्टाचार और असमानता समाज में मौजूद हैं। राजनीतिक दल अक्सर गांधी का नाम लेते हैं, लेकिन व्यवहार में उनके सिद्धांतों से काफी दूर नजर आते हैं।

क्या हम गांधीजी के आदर्श मानते हैं?

सवाल यही है कि क्या हम गांधीजी के आदर्शों को वास्तव में मानते हैं। शिक्षा और भाषणों में अहिंसा और सत्याग्रह की चर्चा तो होती है लेकिन व्यवहार में हिंसा और असहिष्णुता बढ़ रही है। स्वच्छता अभियान जैसे कार्यक्रम गांधी के विचारों से जुड़े हैं, लेकिन समाज में अभी भी अनुशासन की कमी दिखती है।

गांधीजी पर आलोचनाएँ

गांधीजी की आलोचना भी हुई है। कई लोग मानते हैं कि उनके विचार व्यावहारिक राजनीति में हमेशा कारगर नहीं थे। कुछ दलित नेताओं ने उन पर जातिवाद के मुद्दे पर समझौता करने का आरोप लगाया। बावजूद इसके, गांधीजी का योगदान और उनकी नैतिक शक्ति को नकारा नहीं जा सकता।

निष्कर्ष

गांधी जयंती सिर्फ एक औपचारिकता नहीं बल्कि आत्मनिरीक्षण का दिन होना चाहिए। हमें देखना होगा कि हम उनके आदर्शों से कितना दूर हो गए हैं और कितनी सीख अब भी हमारे समाज और राजनीति में प्रासंगिक है। गांधीजी का जीवन और उनके विचार हमें यह याद दिलाते हैं कि असली ताकत हथियारों में नहीं बल्कि सत्य और अहिंसा में है।

स्रोत और संदर्भ: गांधी साहित्य, सरकारी प्रकाशन, UN अहिंसा दिवस दस्तावेज़, ऐतिहासिक ग्रंथ।

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