अगर आधार, वोटर आईडी और पासपोर्ट नागरिकता साबित नहीं करते, तो चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार की नागरिकता कौन जांचता है? जानिए क्यों दायर की गई RTI
नई दिल्ली | 16 जुलाई 2026
भारत में चुनाव लड़ने के लिए सबसे पहली और सबसे महत्वपूर्ण कानूनी शर्त क्या है? जवाब है – उम्मीदवार का भारत का नागरिक होना।
लेकिन हाल के वर्षों में एक दिलचस्प कानूनी और प्रशासनिक स्थिति सामने आई है। सरकार और विभिन्न सरकारी संस्थानों ने अलग-अलग अवसरों पर स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड, वोटर आईडी और पासपोर्ट में से कोई भी दस्तावेज़ अपने आप में भारतीय नागरिकता का कानूनी प्रमाण नहीं है।
ऐसे में एक स्वाभाविक सवाल उठता है कि जब लोकसभा, राज्य विधानसभा या अन्य चुनाव लड़ने के लिए भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है, तो नामांकन के दौरान उम्मीदवार की नागरिकता की जांच आखिर किस आधार पर की जाती है?
इसी सवाल का जवाब जानने के लिए भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) से सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 के तहत जानकारी मांगी गई है।
चुनाव लड़ने के लिए भारतीय नागरिक होना क्यों जरूरी है?
भारत के संविधान का अनुच्छेद 84 स्पष्ट करता है कि लोकसभा का सदस्य बनने के लिए व्यक्ति का भारत का नागरिक होना आवश्यक है। इसी प्रकार अनुच्छेद 173 राज्य विधानसभाओं के सदस्यों के लिए भी यही शर्त निर्धारित करता है।
इसके अलावा, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 4(घ) और धारा 5(ग) के अनुसार उम्मीदवार का संबंधित निर्वाचन क्षेत्र का निर्वाचक (Elector) होना आवश्यक है। जबकि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के अनुसार निर्वाचक बनने के लिए भारतीय नागरिक होना अनिवार्य शर्त है।
इस प्रकार भारतीय नागरिकता चुनाव लड़ने की मूल संवैधानिक योग्यता है।
आधार, वोटर आईडी और पासपोर्ट पर सरकार का क्या कहना है?
हाल के वर्षों में अलग-अलग सरकारी संस्थानों ने इन दस्तावेज़ों की कानूनी स्थिति स्पष्ट की है।
आधार कार्ड
UIDAI कई बार स्पष्ट कर चुका है कि आधार केवल पहचान स्थापित करने का माध्यम है। यह नागरिकता, निवास (डोमिसाइल) या जन्मतिथि का प्रमाण नहीं है।
आधार अधिनियम, 2016 की धारा 9 भी यही कहती है कि आधार नंबर किसी व्यक्ति को नागरिकता या निवास का अधिकार प्रदान नहीं करता।
इसी विषय पर 2026 में सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और राज्यों से जवाब भी मांगा गया।
पासपोर्ट
जून 2026 में विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज़ है और इसे कानूनी रूप से नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाता।
सरकारी सूत्रों के अनुसार यह कोई नई नीति नहीं है, बल्कि पहले से लागू स्थिति है।
वोटर आईडी
वोटर आईडी का उद्देश्य मतदान की प्रक्रिया में मतदाता की पहचान सुनिश्चित करना है। इसे भी भारतीय नागरिकता का अंतिम और स्वतंत्र कानूनी प्रमाण नहीं माना जाता।
फिर उम्मीदवार की नागरिकता कैसे जांची जाती है?
यहीं से सबसे महत्वपूर्ण सवाल शुरू होता है।
यदि आधार, वोटर आईडी और पासपोर्ट तीनों ही अपने आप में नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं हैं, तो नामांकन पत्रों की जांच (Scrutiny of Nomination) के समय Returning Officer किस दस्तावेज़ या प्रक्रिया के आधार पर यह सुनिश्चित करता है कि उम्मीदवार भारतीय नागरिक है?
क्या इसके लिए कोई अलग दस्तावेज़ निर्धारित हैं?
क्या जन्म प्रमाण पत्र, नागरिकता प्रमाण पत्र या अन्य कोई रिकॉर्ड देखा जाता है?
क्या गृह मंत्रालय से सत्यापन कराया जाता है?
या फिर उम्मीदवार के शपथ पत्र और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर ही प्रक्रिया पूरी होती है?
फिलहाल इन सवालों के स्पष्ट उत्तर सार्वजनिक रूप से आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। इसी कारण सूचना के अधिकार के तहत आधिकारिक जानकारी मांगी गई है।
चुनाव आयोग से RTI में क्या-क्या पूछा गया है?
भारत निर्वाचन आयोग के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (CPIO) को भेजी गई RTI में कुल आठ प्रमुख बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई है।
RTI में पूछा गया है कि:
- नामांकन के समय उम्मीदवार की नागरिकता किस दस्तावेज़ या प्रक्रिया से सत्यापित की जाती है।
- क्या नागरिकता साबित करने के लिए कोई निर्धारित या अधिसूचित दस्तावेज़ों की सूची मौजूद है।
- यदि कोई उम्मीदवार केवल आधार, वोटर आईडी या पासपोर्ट प्रस्तुत करता है तो क्या वह पर्याप्त माना जाता है या अतिरिक्त दस्तावेज़ मांगे जाते हैं।
- क्या नागरिकता का सत्यापन किसी अन्य सरकारी विभाग, जैसे गृह मंत्रालय, से कराया जाता है।
- इस पूरी प्रक्रिया से संबंधित कोई Handbook, Manual, SOP या Circular उपलब्ध है या नहीं।
- यदि किसी उम्मीदवार की नागरिकता पर आपत्ति आती है तो उसकी जांच किस प्रक्रिया से होती है।
- पिछले 10 वर्षों में नागरिकता के आधार पर कितनी आपत्तियां प्राप्त हुईं और कितने नामांकन रद्द किए गए।
- यदि यह जानकारी निर्वाचन आयोग के पास उपलब्ध नहीं है तो RTI अधिनियम की धारा 6(3) के तहत संबंधित विभाग को आवेदन स्थानांतरित किया जाए।
यह मुद्दा महत्वपूर्ण क्यों है?
यह केवल दस्तावेज़ों की तकनीकी बहस नहीं है।
भारतीय लोकतंत्र इस सिद्धांत पर आधारित है कि जनता का प्रतिनिधित्व वही व्यक्ति करे जो कानून द्वारा निर्धारित सभी योग्यताओं को पूरा करता हो। इनमें भारतीय नागरिक होना सबसे महत्वपूर्ण शर्तों में से एक है।
ऐसे में यदि आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले पहचान पत्र नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माने जाते, तो नागरिकों के लिए यह जानना स्वाभाविक है कि चुनावी प्रक्रिया में इस संवैधानिक शर्त का पालन किस प्रकार सुनिश्चित किया जाता है।
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 नागरिकों को यही अधिकार देता है कि वे सरकारी संस्थाओं से ऐसी प्रक्रियाओं के बारे में आधिकारिक जानकारी प्राप्त कर सकें।
अब आगे क्या होगा?
RTI अधिनियम के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में सार्वजनिक प्राधिकरण को आवेदन प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर उत्तर देना होता है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत निर्वाचन आयोग इस RTI के जवाब में उम्मीदवारों की नागरिकता सत्यापन प्रक्रिया के संबंध में क्या आधिकारिक जानकारी उपलब्ध कराता है।
यदि आयोग की ओर से विस्तृत उत्तर प्राप्त होता है, तो उससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की नागरिकता की जांच व्यवहार में किस प्रकार की जाती है।
डिस्क्लेमर
यह लेख किसी व्यक्ति, उम्मीदवार या राजनीतिक दल पर कोई आरोप नहीं लगाता। इसका उद्देश्य केवल भारतीय चुनावी प्रक्रिया से जुड़े एक महत्वपूर्ण कानूनी और प्रशासनिक प्रश्न पर आधिकारिक जानकारी प्राप्त करने के लिए दायर RTI आवेदन की जानकारी देना है। इस RTI का अंतिम उत्तर अभी भारत निर्वाचन आयोग से प्राप्त होना शेष है।
संदर्भ
- भारत निर्वाचन आयोग – Contact Us
https://hindi.eci.gov.in/contact-us/contact-us/ - आज तक – “आधार, वोटर आईडी और पासपोर्ट सिर्फ पहचान पत्र…” (26 जून 2026)
https://www.aajtak.in/india/news/story/india-passport-citizenship-proof-mea-clarification-citizenship-rules-ntc-agkp-dskc-2587758-2026-06-26 - TV9 हिंदी – आधार के उपयोग संबंधी UIDAI के नियम
https://www.tv9hindi.com/business/for-what-purposes-can-aadhaar-not-be-used-what-do-uidai-rules-say-3547451.html - दैनिक जागरण – आधार को नागरिकता का प्रमाण मानने पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/question-on-considering-aadhaar-as-proof-of-citizenship-supreme-court/article-56124 - दृष्टि IAS – जन प्रतिनिधित्व अधिनियम
https://www.drishtiias.com/hindi/printpdf/representation-of-people-act - भारत निर्वाचन आयोग – जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951
https://hindi.eci.gov.in/files/file/9315-लोक-प्रतिनिधित्व-अधिनियम-1951/ - केंद्रीय सूचना आयोग – सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005
https://cic.gov.in/sites/default/files/rti-actinhindi.pdf