उत्तराखंड में हाल ही में हुए पेपर लीक कांड ने राज्य सरकार की कड़ी परीक्षा कानूनों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस घटना को “नकल जिहाद” करार दिया, जिससे यह मामला और भी संवेदनशील हो गया है।


21 सितंबर 2025 को उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षा के दौरान, परीक्षा शुरू होने के 30 मिनट के भीतर प्रश्न पत्र के तीन पेज कथित रूप से लीक हो गए। मुख्य आरोपी खालिद मलिक ने परीक्षा केंद्र में अवैध प्रवेश किया, अपने मोज़ों में मोबाइल फोन छुपाया और प्रश्न पत्र की फोटो अपनी बहन को भेज दी, जिसने उसे अन्य लोगों तक पहुँचाया। इस घटना ने राज्य में परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए हैं।


बार-बार होने वाली परीक्षा में धोखाधड़ी को देखते हुए, उत्तराखंड सरकार ने पब्लिक एग्ज़ामिनेशन्स (अनफेयर मीन्स रोकथाम) अधिनियम, 2024 लागू किया। इसका उद्देश्य धोखाधड़ी रोकना और सार्वजनिक परीक्षाओं की साख बनाए रखना था। लेकिन इस हालिया घटना ने कानून की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए खालिद मलिक और उसकी बहन सबिया को गिरफ्तार किया। जांच में पता चला कि मलिक ने परीक्षा केंद्र में अवैध प्रवेश किया और मोबाइल से प्रश्न पत्र की फोटो ली। बाद में सबिया ने यह फोटो एक सहायक प्रोफेसर को भेजा, जिसने इसे सोशल मीडिया पर साझा कर दिया।
#Uttarakhand CM @pushkardhami says, “Pradesh mein nakal jihadiyon ko mitti mein Milane tak chain se nahi baithegi.” Adds that over 100 involved in paper leak racket of competitive exams have been arrested. pic.twitter.com/A4L0YSgWAh
— kautilyasTOI (@kautilyasTOI) September 24, 2025
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस घटना को “नकल जिहाद” करार दिया, और इसे राज्य की परीक्षा प्रणाली में हो रहे गंभीर घोटालों के रूप में वर्णित किया। उनके अनुसार, यह केवल एक पेपर लीक नहीं बल्कि शैक्षणिक ईमानदारी और भर्ती प्रक्रिया पर हमला है।
#WATCH | Dehradun: On mastermind, Khalid Malik's arrest in UKSSSC graduate-level exam paper leak, Uttarakhand CM Pushkar Singh Dhami says, "Future of youth will not be allowed to be played with. Action will be taken against whoever is found to be guilty. We have a zero-tolerance… pic.twitter.com/h5GNAYaZ77
— ANI (@ANI) September 24, 2025
इस घटना ने पूरे उत्तराखंड में भारी विरोध को जन्म दिया। छात्रों और नौकरी चाहने वालों ने 22 सितंबर 2025 को देहरादून के परेड ग्राउंड में विरोध प्रदर्शन किया और CBI जांच और परीक्षा रद्द करने की मांग की। उत्तराखंड बेरोजगार संघ ने प्रदर्शन का नेतृत्व किया और बार-बार होने वाले ऐसे मामलों और सरकार की विफलता पर चिंता जताई।
यह मामला उत्तराखंड की भर्ती प्रक्रिया में गहराई से मौजूद समस्याओं को उजागर करता है। कड़ी कानून और UKSSSC के गठन के बावजूद, पेपर लीक जैसी घटनाएँ लगातार हो रही हैं। कार्यान्वयन और जवाबदेही की कमी ने लोगों के बीच भरोसे को कम कर दिया है।
हालांकि सरकार की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, इसे केवल दंडात्मक उपायों तक सीमित नहीं रखना चाहिए। भर्ती प्रक्रिया में सुरक्षित परीक्षा प्रणाली, कड़ी निगरानी, और पारदर्शिता सुनिश्चित करना आवश्यक है।
राज्य इस समस्या से जूझ रहा है, लेकिन सवाल यही है: क्या यह नया कानून परीक्षा धोखाधड़ी को रोक पाएगा, या सिर्फ कागज पर ही रह जाएगा?
उत्तराखंड पेपर लीक कांड पर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. उत्तराखंड पेपर लीक कांड कब हुआ?
यह घटना 21 सितंबर 2025 को हुई, जब UKSSSC (उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग) की भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र मात्र 30 मिनट के भीतर लीक हो गया।
2. मुख्य आरोपी कौन है?
मुख्य आरोपी का नाम खालिद मलिक है, जिसने परीक्षा केंद्र में अवैध रूप से प्रवेश कर मोबाइल से प्रश्न पत्र की फोटो ली और अपनी बहन सबिया को भेज दी।
3. सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए कौन-सा कानून बनाया था?
उत्तराखंड सरकार ने पब्लिक एग्ज़ामिनेशन्स (अनफेयर मीन्स रोकथाम) अधिनियम, 2024 लागू किया था। इसका उद्देश्य परीक्षा में नकल और धोखाधड़ी रोकना था।
4. फिर भी पेपर कैसे लीक हो गया?
कानून तो बना, लेकिन कार्यान्वयन (implementation) की कमी और सुरक्षा खामियों की वजह से पेपर लीक हो गया। आरोपी ने मोबाइल फोन परीक्षा केंद्र में ले जाकर प्रश्न पत्र की तस्वीरें भेज दीं।
5. मुख्यमंत्री ने इस घटना को क्या कहा?
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे “नकल जिहाद” करार दिया और कहा कि यह केवल एक पेपर लीक नहीं बल्कि भर्ती प्रक्रिया और शैक्षणिक ईमानदारी पर हमला है।
6. छात्रों और जनता की क्या प्रतिक्रिया रही?
छात्रों और नौकरी अभ्यर्थियों ने 22 सितंबर 2025 को देहरादून में बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। उनकी मांग थी कि इस मामले की CBI जांच हो और परीक्षा को रद्द किया जाए।
7. क्या सरकार ने कोई कार्रवाई की है?
हाँ, आरोपी खालिद मलिक और उसकी बहन सबिया को गिरफ्तार किया गया है। जांच जारी है और प्रशासन ने कहा है कि दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी।
8. क्या पेपर लीक रोकने के लिए आगे और कदम उठाए जाएंगे?
सरकार ने संकेत दिया है कि परीक्षा प्रणाली को और सुरक्षित बनाने, निगरानी बढ़ाने और तकनीकी उपाय लागू करने की दिशा में काम किया जाएगा।