लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गिरफ्तार किया गया। यह गिरफ्तारी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं बल्कि लद्दाख आंदोलन की दिशा बदलने वाली घटना साबित हुई। नीचे देखें कि इस गिरफ्तारी के बाद क्या-क्या हुआ।
गिरफ्तारी और आरोप
- वांगचुक पर आरोप है कि उन्होंने अपने भाषणों और अपीलों से भीड़ को भड़काया। - 24 सितंबर को हुए विरोध में चार लोगों की मौत और कई घायल हुए। - गिरफ्तारी के बाद उन्हें राजस्थान की जोधपुर जेल भेज दिया गया। - सरकार ने यह भी दावा किया कि उनके NGO का विदेशी फंड गलत इस्तेमाल हुआ, जिसके कारण SECMOL का FCRA लाइसेंस रद्द कर दिया गया।
इंटरनेट बंद और प्रशासनिक कदम
गिरफ्तारी के तुरंत बाद लद्दाख में मोबाइल इंटरनेट सेवाएँ बंद कर दी गईं। प्रशासन ने यह कदम शांति बनाए रखने के नाम पर उठाया। हालांकि स्थानीय लोगों ने इसे आवाज दबाने की कोशिश बताया।
परिवार और समर्थकों की प्रतिक्रिया
वांगचुक की पत्नी गितांजलि आंगमो ने आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक एक गांधीवादी हैं और उन्होंने हमेशा शांतिपूर्ण रास्ता अपनाया है। उनके मुताबिक यह कार्रवाई एक तरह की राजनीतिक प्रतिशोध है।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
- Leh Apex Body ने केंद्र सरकार के साथ चल रही वार्ताओं से बाहर निकलने की घोषणा की। - देश के कई हिस्सों में नागरिक समाज और संगठनों ने वांगचुक की रिहाई की मांग करते हुए प्रदर्शन किया। - उत्तराखंड, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर में छोटे-बड़े आंदोलन देखने को मिले।
पुलिस और सरकार का पक्ष
पुलिस का दावा है कि प्रदर्शन के दौरान फायरिंग आत्मरक्षा में हुई और गिरफ्तारी ज़रूरी थी क्योंकि वांगचुक की गतिविधियाँ क्षेत्र की सुरक्षा और शांति के लिए खतरा बन चुकी थीं। सरकार की ओर से कहा गया कि यह सिर्फ कानून और व्यवस्था बनाए रखने की कार्रवाई है।
मुख्य सवाल
- क्या NSA जैसे कठोर कानून का इस्तेमाल जायज़ था?
- क्या NGO का लाइसेंस रद्द करना तर्कसंगत या दबाव की राजनीति है?
- क्या लद्दाख आंदोलन अब और तेज होगा?
- क्या यह मामला न्यायपालिका में चुनौती झेलेगा?
जिस Sonam Wangchuk को सरकार ने देशद्रोही बता कर गिरफ़्तार किया है
वो कौन हैं ज़रा सुन लीजिए pic.twitter.com/jpT8nlg3aX
— Saurabh shukla (@Saurabh_Unmute) September 26, 2025
जिस Sonam Wangchuk को सरकार ने देशद्रोही बता कर गिरफ़्तार किया है
वो कौन हैं ज़रा सुन लीजिए pic.twitter.com/jpT8nlg3aX
निष्कर्ष
सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी लद्दाख के आंदोलन को नया मोड़ दे चुकी है। यह मामला दिखाता है कि जब कोई शख्स जनता की आवाज बनता है, तो सत्ता उसकी ताकत से घबराने लगती है। अब सवाल यह है कि क्या सरकार सच में पारदर्शी जांच और न्याय की राह चुनेगी या विरोध की हर आवाज को दबाने का सिलसिला जारी रहेगा।