हाल ही में भारत में एक नया विवाद खड़ा हो गया है जिसे “I Love Mohammad अभियान” कहा जा रहा है। यह विवाद उत्तर प्रदेश के कानपुर (Rawatpur क्षेत्र) से शुरू हुआ और देखते ही देखते कई राज्यों में फैल गया। इस विवाद ने हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच ध्रुवीकरण (polarisation) को और तेज़ कर दिया है। इस लेख में हम जानेंगे कि यह अभियान कैसे शुरू हुआ, इसके पीछे की सच्चाई क्या है, और हिंदू दृष्टिकोण से हमें इसे कैसे देखना चाहिए।
“I Love Mohammad” अभियान कैसे शुरू हुआ?
- 4 सितंबर 2025 को कानपुर के रावतपुर क्षेत्र में Barawafat (Eid-Milad-un-Nabi) के जुलूस के दौरान एक लाइट बोर्ड लगाया गया, जिस पर लिखा था: “I Love Muhammad”।
- स्थानीय हिंदू संगठनों ने आपत्ति जताई कि यह “नया रिवाज” है और पहले कभी नहीं किया गया।
- पुलिस ने उस बोर्ड को हटवा दिया और एफआईआर दर्ज की। (India Today रिपोर्ट देखें)
- इसके बाद यह अभियान तेजी से उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, तेलंगाना समेत कई राज्यों में फैल गया।
प्रतिक्रियाएँ और विरोध
मुस्लिम पक्ष
- मुस्लिम संगठनों ने कहा कि “I Love Mohammad” केवल श्रद्धा और प्रेम का प्रतीक है।
- AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बताया और सवाल किया कि “अगर कोई कहे I Love Mahadev तो कोई आपत्ति क्यों नहीं होती?”
#WATCH | Purnea, Bihar: On 'I Love Muhammad' row, AIMIM chief and MP Asaduddin Owaisi says, "… What is anti-national about love? Are we promoting violence with love? What is the problem? This means you are against love… A Muslim is not a true Muslim till the time he believes… pic.twitter.com/dmth2HvgRC
— ANI (@ANI) September 26, 2025
हिंदू पक्ष
- हिंदू संगठनों ने इसका विरोध किया और जवाब में “I Love Mahadev”, “I Love Ram”, जैसे अभियान शुरू किए।
- वाराणसी में “I Love Mahadev” पोस्टर और टैटू भी सामने आए।
- सोशल मीडिया पर भी #ILoveMahadev और #ILoveRam ट्रेंड करने लगे।
आई लव मोहम्मद के जवाब में साधु-संतों ने आई लव महादेव का पोस्टर वायरल किया
— News24 (@news24tvchannel) September 25, 2025
I Love Mahadev | I Love Muhammad pic.twitter.com/EmlJMSt96P
विवाद का राजनीतिक और सामाजिक पहलू
धार्मिक अभिव्यक्ति बनाम सामाजिक शांति
- हर धर्म को अपने भगवान या पैगंबर के प्रति प्रेम दिखाने का अधिकार है।
- लेकिन जब यह सार्वजनिक स्थानों पर विवादित रूप में हो, तो सामाजिक सद्भाव बिगड़ सकता है।
ध्रुवीकरण की रणनीति
- यह विवाद अचानक नहीं, बल्कि योजनाबद्ध लगता है।
- “I Love Mohammad” को एक तरह से Gen-Z मुस्लिम पहचान का नया प्रतीक बनाने की कोशिश कहा जा सकता है। (Hindu Existence रिपोर्ट)
क्यों लगती है यह सोची-समझी साज़िश?
समय का चयन – नवरात्रि और गणेशोत्सव जैसे हिंदू पर्व बिलकुल सामने हैं। ऐसे समय पर मुस्लिम समाज के कुछ संगठनों का “नया अभियान” लाना एक संदेश देता है – “हम अपनी पहचान ज़ोर-शोर से दिखाएँगे, चाहे किसी और को असुविधा हो या न हो।”
सोशल मीडिया का इस्तेमाल – इस नारे को सिर्फ स्थानीय नहीं रखा गया बल्कि ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम और यहाँ तक कि टेलीग्राम चैनलों पर भी वायरल किया गया। इसका मकसद ज़्यादा से ज़्यादा ध्यान खींचना था।
हिंदू समाज की प्रतिक्रिया भांपना – हर बार देखा गया है कि जब हिंदू अपनी भावनाएँ व्यक्त करते हैं, तो उन्हें “communal” कहकर बदनाम किया जाता है। शायद इस बार भी यही रणनीति हो – हिंदू प्रतिक्रिया दें और फिर उनको दोषी ठहरा दिया जाए।
राजनीतिक ध्रुवीकरण – जैसे-जैसे चुनाव नज़दीक आते हैं, ऐसे मुद्दे उठाए जाते हैं ताकि मुस्लिम वोट बैंक को एकजुट किया जा सके और हिंदुओं को भावनात्मक रूप से उकसाया जा सके।
निष्कर्ष – मेरी अपनी बात
“I Love Mohammad” विवाद ने हमें फिर याद दिलाया कि अक्सर जब-जब हिंदुओं के बड़े त्योहार आते हैं, तभी कुछ न कुछ ऐसा नया मुद्दा उठाया जाता है जो समाज में तनाव फैलाए। यह महज़ इत्तेफ़ाक़ नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी चाल लगती है।
मक़सद साफ़ है
- हिंदुओं की भावनाओं को भड़काना,
- उनके पर्व और परंपराओं की गरिमा को ठेस पहुँचाना,
- और राजनीतिक फायदे के लिए एक खास वोट बैंक को मजबूत करना।
लेकिन इस बार तस्वीर अलग है।
हिंदू समाज अब चुप रहने वाला नहीं है। हम शांति से, मगर पूरी ताक़त के साथ जवाब दे रहे हैं “I Love Mahadev”, “I Love Ram” जैसे अभियानों से। यह सिर्फ नारे नहीं हैं, यह हमारी आस्था और पहचान का प्रतीक हैं। यह संदेश हैं कि हम अपनी जड़ों पर गर्व करते हैं और अब किसी भी कीमत पर उन्हें दबने नहीं देंगे।
मेरी नज़र में सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है कि इस तरह के प्रयोगों को नज़रअंदाज़ न करें।
- सरकार को चाहिए कि कानून-व्यवस्था पर सख़्ती से अमल करे।
- समाज को चाहिए कि अपनी आवाज़ शांतिपूर्ण और संगठित तरीके से उठाए।
और सबसे ज़रूरी हमें हमेशा याद रखना होगा कि भारत की आत्मा सनातन धर्म है। जब तक सनातन मज़बूत है, तब तक भारत भी मज़बूत रहेगा।