February 5, 2026
POK में पाकिस्तानी सेना का आतंक - अपहरण, हत्या और मानवाधिकार उल्लंघन की पूरी कहानी
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Human rights violations in Pakistan and POK protests
POK PROTEST EXCLUSIVE

POK में पाकिस्तानी सेना का आतंक - अपहरण, हत्या और मानवाधिकार उल्लंघन की पूरी कहानी

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की जनता अब खुलकर सेना के खिलाफ आवाज़ उठा रही है। शांति से शुरू हुआ आंदोलन अब खून और डर की दास्तान बन गया है।

Published: October 04, 2025

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर, यानी POK, एक ऐसा भूभाग है जहाँ दशकों से जनता दमन का सामना कर रही है। यहाँ का हर नागरिक जानता है कि सत्ता इस इलाके में नहीं, बल्कि रावलपिंडी की सैन्य बटालियनों में छिपी है। आज वही जनता, जो वर्षों तक खामोश रही, सड़कों पर उतर आई है। उनकी आवाज़ें अब बंदूक की नली के सामने खड़ी हैं।

आंदोलन की शुरुआत - भूख, बिजली और अन्याय

POK के लोग महीनों से बढ़ती महँगाई, बिजली की भारी दरों और बेरोजगारी के खिलाफ आवाज़ उठा रहे थे। सरकार की नाकामी और सेना की दबंगई ने आग में घी डालने का काम किया। स्थानीय संगठनों ने आंदोलन की शुरुआत आर्थिक मुद्दों से की, लेकिन धीरे-धीरे यह विरोध पाकिस्तान की नीति के खिलाफ एक बड़े जनआंदोलन में बदल गया।

सेना की बर्बर कार्रवाई

जब जनता सड़कों पर उतरी, तो पाकिस्तानी सेना ने वही पुराना तरीका अपनाया - डर और गोलियों से जवाब। कई जगहों पर सीधी गोलीबारी की गई, जिसमें कई लोगों की मौत हुई और दर्जनों घायल हुए। स्थानीय पत्रकारों और सोशल मीडिया पर साझा क्लिप्स में सुरक्षा बलों को शांतिपूर्ण भीड़ पर फायर करते देखा गया। यह वही सेना है जो खुद को ‘रक्षक’ कहती है, लेकिन अपने ही नागरिकों के खिलाफ बंदूक तान रही है।

अपहरण और हत्याएँ - डर का नया चेहरा

POK में हाल की घटनाओं में अपहरण के मामले सबसे भयावह हैं। कई परिवारों ने बताया कि उनके बेटे, भाई या पिता को रात में सेना या ISI के लोग उठा ले गए। अगले दिन उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली। कुछ शव बाद में नदियों के किनारे या जंगलों में पाए गए।

यह सिलसिला नया नहीं है। मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट बताती है कि पिछले दस सालों में सैकड़ों लोग लापता हुए हैं, जिनमें से कई आज तक नहीं लौटे। पर इस बार जनता डरने को तैयार नहीं है। वे खुलेआम कह रहे हैं – ‘हम अपने लापता लोगों के लिए जवाब चाहते हैं।’

सूचना पर रोक और प्रेस की आवाज़ दबाना

घटनाओं के फैलने के साथ ही पाकिस्तानी सरकार ने इंटरनेट और मोबाइल सेवाएँ बंद कर दीं। पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया, और इस्लामाबाद प्रेस क्लब पर भी पुलिस ने छापा मारा। यह साफ संकेत था कि सत्ता सच्चाई छुपाना चाहती है। लेकिन डिजिटल युग में सच्चाई को रोका नहीं जा सकता। सोशल मीडिया पर जो वीडियो और तस्वीरें सामने आईं, उन्होंने पाकिस्तानी तंत्र की पोल खोल दी।

मानवाधिकार संगठनों की चेतावनी

Amnesty International और Human Rights Watch ने इन घटनाओं पर चिंता जताई है। उन्होंने पाकिस्तान से पारदर्शी जांच और लापता लोगों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने भी कहा है कि यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय जांच के योग्य है।

भारत का रुख और कूटनीतिक असर

भारत ने इन घटनाओं को पाकिस्तान के दमनकारी चरित्र का प्रमाण बताया है। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि यह पाकिस्तान की नीतियों का स्वाभाविक परिणाम है। भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि POK भारत का अभिन्न अंग है और वहाँ की जनता की आवाज़ भारत के समर्थन की हकदार है।

इन घटनाओं के बाद अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की स्थिति मजबूत हुई है। अब पाकिस्तान पर दबाव बढ़ रहा है कि वह अपने कब्जे वाले क्षेत्रों में मानवाधिकारों का सम्मान करे।

जनता की जिद और भविष्य की दिशा

POK के लोग अब केवल रोटी और बिजली नहीं मांग रहे। वे आज़ादी की बात कर रहे हैं - पाकिस्तान की पकड़ से निकलने की। उनके नारे साफ हैं: ‘हम दास नहीं, नागरिक हैं।’ सेना चाहे जितनी ताकत लगा ले, यह आवाज़ अब दबने वाली नहीं।

सोशल मीडिया का प्रभाव

Facebook, Twitter और YouTube पर POK से जुड़े वीडियो लगातार वायरल हो रहे हैं। हैशटैग #POKProtests और #AzadKashmirReality ट्रेंड कर रहे हैं। यह आंदोलन अब केवल स्थानीय नहीं रहा, बल्कि वैश्विक ध्यान का केंद्र बन चुका है।

तथ्य: स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, अब तक 12 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और 50 से अधिक घायल हुए हैं। लगभग 30 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इंटरनेट बंद होने से सटीक आंकड़े प्राप्त करना कठिन है।

निष्कर्ष - सच्चाई को अब छुपाया नहीं जा सकता

POK में हो रहे दमन ने पाकिस्तान के चेहरे से नकाब हटा दिया है। जनता अब खामोश नहीं रहेगी। गोली, बंदूक और डर का दौर अब ज्यादा नहीं चलेगा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह समझना होगा कि यह सिर्फ एक क्षेत्रीय समस्या नहीं, बल्कि मानवाधिकार और न्याय का सवाल है।

भारत के लिए यह अवसर है कि वह इन घटनाओं को दुनिया के सामने रखे और दिखाए कि पाकिस्तान अपने ही नागरिकों के साथ क्या कर रहा है।

Desi Radar इस विषय पर निगरानी बनाए रखेगा और आगे आने वाली रिपोर्टों में तथ्य और साक्ष्य के साथ अपडेट देगा।

अंतिम शब्द: POK में जो कुछ हुआ, उसने यह साबित कर दिया कि बंदूकें लोगों की आवाज़ को सदा के लिए नहीं रोक सकतीं। इंसाफ की लड़ाई लंबी है, लेकिन अब यह दिशा बदल चुकी है।

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