February 5, 2026
दशहरा 2025: विजयदशमी का महत्व, इतिहास और बदलती परंपराएँ | DesiRadar
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दशहरा 2025: विजयदशमी का महत्व, इतिहास और बदलती परंपराएँ

प्रकाशित: 2 अक्टूबर 2025लेख: DesiRadar Editorialपढ़ने का समय: 15 मिनट
एक नजर में
  • दशहरा अच्छाई की बुराई पर विजय का पर्व है।
  • रामायण में भगवान राम द्वारा रावण वध और देवी दुर्गा द्वारा महिषासुर मर्दिनी की कथा इससे जुड़ी है।
  • भारत के अलग-अलग हिस्सों में दशहरा अलग-अलग परंपराओं और रीति-रिवाजों से मनाया जाता है।
  • आधुनिक समय में दशहरा पर्यावरणीय और डिजिटल दोनों दृष्टि से नए रूप ले रहा है।

परिचय

दशहरा जिसे विजयदशमी कहा जाता है, भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं में गहरी जड़ें रखता है। यह त्योहार हर साल आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी को मनाया जाता है और यह नवरात्रि का समापन भी है। दशहरे की सबसे बड़ी पहचान अच्छाई की बुराई पर विजय है। यही कारण है कि इस दिन रावण दहन और दुर्गा पूजा का विसर्जन विशेष महत्व रखते हैं।

रामायण और रावण दहन

रामायण की कथा के अनुसार रावण द्वारा सीता हरण के बाद भगवान राम ने वानर सेना और हनुमान के सहयोग से लंका पर आक्रमण किया। दस दिनों तक चला यह युद्ध दशमी को समाप्त हुआ और भगवान राम ने रावण का वध किया। इस विजय को ही दशहरा कहा गया।

उत्तर भारत में दशहरे की शाम को रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के विशाल पुतलों का दहन किया जाता है। हजारों लोग एकत्र होकर इस दृश्य को देखते हैं और आतिशबाजी के बीच अच्छाई की विजय का उत्सव मनाते हैं।

दुर्गा पूजा और शक्ति की उपासना

पूर्वी भारत में दशहरा दुर्गा पूजा का समापन है। नौ दिनों तक दुर्गा पूजा की जाती है और दशमी को प्रतिमाओं का विसर्जन होता है। यह शक्ति की विजय और महिषासुर के अंत का प्रतीक है।

कोलकाता और बंगाल के अन्य हिस्सों में पंडाल सजावट, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामूहिक भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है।

भारत में क्षेत्रीय विविधता

  • उत्तर भारत: रामलीला और रावण दहन।
  • पश्चिम बंगाल: दुर्गा पूजा और विसर्जन।
  • कर्नाटक: मैसूर दशहरा और शाही जुलूस।
  • महाराष्ट्र: शमी पूजन और आयुध पूजा।
  • गुजरात: नवरात्रि और गरबा-डांडिया का समापन।

सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व

दशहरा केवल धार्मिक पर्व नहीं बल्कि सामाजिक जुड़ाव का भी प्रतीक है। मेले, मेलजोल, रामलीला और सांस्कृतिक आयोजन समाज को जोड़ते हैं। बच्चों को नैतिक शिक्षा और बड़ों को सामाजिक मूल्य याद दिलाने का यह अवसर है।

आधुनिक समय और चुनौतियाँ

आधुनिक समय में दशहरा पर्यावरणीय चेतना के साथ मनाया जा रहा है। इको-फ्रेंडली पुतले, कम प्रदूषण वाली आतिशबाजी और मिट्टी की प्रतिमाएँ नई पहल का हिस्सा हैं।

डिजिटल युग में सोशल मीडिया पर लाइव प्रसारण और फोटो-वीडियो शेयर करना उत्सव को और व्यापक बना रहा है।

निष्कर्ष

दशहरा 2025 हमें यह याद दिलाता है कि चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों, सत्य और धर्म की विजय निश्चित है। यह पर्व केवल धार्मिक आस्था नहीं बल्कि सामाजिक जुड़ाव, सांस्कृतिक पहचान और भविष्य की उम्मीदों का प्रतीक भी है।

स्रोत और संदर्भ: BBC, Britannica, Times of India, स्थानीय रिपोर्टिंग

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