January 30, 2026
बिहार चुनाव 2025: सत्ता, विपक्ष और जनता के असली मुद्दे | DesiRadar
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बिहार चुनाव 2025: सत्ता, विपक्ष और जनता के असली मुद्दे

प्रकाशित: 1 अक्टूबर 2025लेख: DesiRadar Editorialपढ़ने का समय: 12 मिनट
एक नजर में
  • जनता पूछ रही है - रोजगार क्यों नहीं, शिक्षा क्यों कमजोर, अस्पताल खाली क्यों हैं.
  • नीतीश कुमार ने गठबंधन बदले लेकिन जनता की उम्मीदें अधूरी रहीं.
  • तेजस्वी यादव ने विपक्ष में शोर मचाया लेकिन ठोस विजन नहीं दिखाया.

परिचय

बिहार चुनाव 2025 सिर्फ सत्ता की लड़ाई नहीं है बल्कि जनता की उम्मीदों की कसौटी भी है. पिछले पांच सालों में राज्य की राजनीति में सबसे ज्यादा शोर सत्ता समीकरण बदलने पर हुआ. नीतीश कुमार ने बार-बार गठबंधन बदलकर अपनी कुर्सी बचाई, वहीं विपक्ष ने चार साल तक यही गणित बैठाने में समय गंवाया. लेकिन इन सबके बीच जनता के असली सवाल बार-बार पीछे छूटते रहे.

सरकार से सवाल

नीतीश कुमार को एक दौर में सुशासन बाबू कहा गया था, लेकिन आज उनका शासन बेरोजगारी और पलायन की मार झेल रहा है. लाखों युवा अब भी रोजगार की तलाश में बाहर जा रहे हैं. सरकारी भर्तियाँ या तो अधर में अटकी रहीं या पेपर लीक कांड में फँस गईं. पटना हाईकोर्ट तक को कई बार हस्तक्षेप करना पड़ा. छात्रों का भरोसा टूटा है.

स्वास्थ्य व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है. गाँवों के अस्पतालों में डॉक्टर नहीं हैं, दवाइयाँ कम हैं और कई जिलों में पानी अब भी ज़हरीला है. शिक्षा की हालत और खराब है - शिक्षक की कमी, ढाँचागत समस्याएँ और बार-बार की परीक्षा विवाद ने बच्चों और युवाओं को निराश किया है.

विपक्ष से सवाल

तेजस्वी यादव ने बेरोजगारी और शिक्षा पर आवाज उठाई, लेकिन सिर्फ सवाल पूछने से राजनीति नहीं चलती. जनता चाहती है कि विपक्ष ठोस विकल्प भी दे. लेकिन पिछले चार सालों में विपक्ष ने ज्यादा समय नीतीश कुमार को मनाने या गिराने में लगाया. कोई ठोस नीति रोडमैप सामने नहीं रखा. जनता पूछ रही है कि अगर कल विपक्ष सत्ता में आया तो पहले सौ दिनों में वह क्या करेगा.

जनता की असली समस्याएँ

जनता के मुद्दे बार-बार वही हैं - रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पलायन और भ्रष्टाचार. इन मुद्दों को चुनावी घोषणाओं में भले छुआ जाता है, लेकिन सरकारें आती-जाती हैं और समस्याएँ जस की तस बनी रहती हैं.

  • रोजगार और भर्ती में पारदर्शिता
  • पेपर लीक रोकने की ठोस व्यवस्था
  • गाँव-शहर में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ
  • स्कूलों और कॉलेजों में गुणवत्ता शिक्षा
  • पलायन रोकने के लिए उद्योग और निवेश
  • भ्रष्टाचार पर नियंत्रण

जनता की ताकत

लोकतंत्र में सबसे बड़ी ताकत जनता के पास होती है. बिहार की जनता कई बार सत्ता बदलकर यह दिखा चुकी है कि कुर्सी से बड़ी जनता की आवाज है. इस बार भी वही तय करेगी कि नारे जीतेंगे या असली काम. जनता अब ठोस जवाब चाहती है, सिर्फ नारों से भरोसा नहीं होने वाला.

निष्कर्ष

बिहार चुनाव 2025 का असली सवाल यही है कि क्या सत्ता और विपक्ष दोनों जनता के मुद्दों पर गंभीर होंगे या फिर जातीय समीकरण और गठबंधन राजनीति में उलझे रहेंगे. नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव दोनों से जनता जवाब चाहती है. यह चुनाव सिर्फ नेताओं की कुर्सी का नहीं बल्कि बिहार के भविष्य का इम्तिहान है.

स्रोत और संदर्भ: स्थानीय रिपोर्टिंग, बिहार विधानसभा की चर्चाएँ, मीडिया रिपोर्ट और सरकारी आँकड़े.

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