Vijay Kumar Malhotra का निधन: दिल्ली का पुराना चेहरा और लंबा राजनीतिक सफर
समाचार का सार
भाजपा के वरिष्ठ नेता Vijay Kumar Malhotra का 93 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे दिल्ली के अस्पताल में भर्ती थे और आज उनका देहांत हुआ। उनकी राजनीतिक यात्रा, दिल्ली में अहम भूमिका और 1999 की लोकसभा जीत ने उन्हें एक जाना-पहचाना चेहरा बना दिया।
प्रारम्भिक जीवन और राजनीतिक प्रवेश
Vijay Kumar Malhotra का जन्म 3 दिसंबर 1931 को लाहौर में हुआ था। विभाजन के बाद उनका परिवार भारत आया और उन्होंने राज्य की राजनीति में कदम रखा। वे दिल्ली भाजपा के शुरुआती संगठकों में रहे और जल्दी ही पार्टी में एक मुख्य स्तंभ बन गए।
राष्ट्रीय पहचान और 1999 की जीत
Malhotra की राष्ट्रीय पहचान को सबसे अधिक मजबूती 1999 में मिली जब उन्होंने उस समय के प्रतिष्ठित विपक्षी उम्मीदवार और बाद में प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह को हराया। यह जीत उनकी राजनीतिक छवि के लिए निर्णायक रही और उन्हें संसद स्तर पर मान्यता दिलाई।
दिल्ली में CM के संभावित चेहरे
Vijay Kumar Malhotra को दिल्ली में कई बार भाजपा का मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित किया गया। 1993 में भाजपा ने उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में पेश किया था पर अंततः पार्टी ने मदनलाल खुराना को सीएम बनाया। बाद में 2008 में भी उन्हें भाजपा का मुख्यमंत्रित्वीय चेहरा माना गया था, पर उस चुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल की। इन घटनाओं ने दिखाया कि पार्टी ने उन्हें दिल्ली के नेतृत्व के लिए कितना भरोसा किया।
“मल्होत्रा को दिल्ली भाजपा का एक मजबूत संगठनकर्ता और नेता माना जाता रहा है। मुख्यमंत्री के रूप में उनका नाम अक्सर सामने आया।”
पार्टी में योगदान और भूमिकाएँ
Malhotra ने दिल्ली BJP को मजबूत करने में लंबा समय लगाया। वे पार्टी के कई पदों पर रहे, विधानसभा और संसद में प्रतिनिधित्व किया और संगठनात्मक काम को प्राथमिकता दी। उनके करियर में स्थानीय और राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर भूमिका रही।
प्रतिक्रियाएँ और शोक
उनके निधन पर भाजपा के नेता, सहयोगी और विरोधी नेताओं ने शोक व्यक्त किया। पार्टी ने उन्हें एक समर्पित संगठनकर्ता बताया जिन्होंने कई पीढ़ियों के कार्यकर्ताओं को मार्गदर्शन दिया। प्रधानमंत्री सहित कई प्रमुख नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
निष्कर्ष
Vijay Kumar Malhotra का जीवन भारतीय राजनीति के एक लंबे अध्याय की तस्वीर है। वे दिल्ली और राष्ट्रीय राजनीति में एक स्थायी योगदान छोड़कर गए। उनका जाना एक युग के अंत जैसा है, और राजनीति में उनकी छवि और काम देश के राजनीतिक इतिहास में दर्ज रहेगी।
