February 2, 2026

हाल ही में भारत में एक नया विवाद खड़ा हो गया है जिसे “I Love Mohammad अभियान” कहा जा रहा है। यह विवाद उत्तर प्रदेश के कानपुर (Rawatpur क्षेत्र) से शुरू हुआ और देखते ही देखते कई राज्यों में फैल गया। इस विवाद ने हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच ध्रुवीकरण (polarisation) को और तेज़ कर दिया है। इस लेख में हम जानेंगे कि यह अभियान कैसे शुरू हुआ, इसके पीछे की सच्चाई क्या है, और हिंदू दृष्टिकोण से हमें इसे कैसे देखना चाहिए।

“I Love Mohammad” अभियान कैसे शुरू हुआ?

प्रतिक्रियाएँ और विरोध

मुस्लिम पक्ष

हिंदू पक्ष

विवाद का राजनीतिक और सामाजिक पहलू

धार्मिक अभिव्यक्ति बनाम सामाजिक शांति

ध्रुवीकरण की रणनीति

क्यों लगती है यह सोची-समझी साज़िश?

समय का चयन – नवरात्रि और गणेशोत्सव जैसे हिंदू पर्व बिलकुल सामने हैं। ऐसे समय पर मुस्लिम समाज के कुछ संगठनों का “नया अभियान” लाना एक संदेश देता है – “हम अपनी पहचान ज़ोर-शोर से दिखाएँगे, चाहे किसी और को असुविधा हो या न हो।”

सोशल मीडिया का इस्तेमाल – इस नारे को सिर्फ स्थानीय नहीं रखा गया बल्कि ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम और यहाँ तक कि टेलीग्राम चैनलों पर भी वायरल किया गया। इसका मकसद ज़्यादा से ज़्यादा ध्यान खींचना था।

हिंदू समाज की प्रतिक्रिया भांपना – हर बार देखा गया है कि जब हिंदू अपनी भावनाएँ व्यक्त करते हैं, तो उन्हें “communal” कहकर बदनाम किया जाता है। शायद इस बार भी यही रणनीति हो – हिंदू प्रतिक्रिया दें और फिर उनको दोषी ठहरा दिया जाए।

राजनीतिक ध्रुवीकरण – जैसे-जैसे चुनाव नज़दीक आते हैं, ऐसे मुद्दे उठाए जाते हैं ताकि मुस्लिम वोट बैंक को एकजुट किया जा सके और हिंदुओं को भावनात्मक रूप से उकसाया जा सके।

निष्कर्ष – मेरी अपनी बात

“I Love Mohammad” विवाद ने हमें फिर याद दिलाया कि अक्सर जब-जब हिंदुओं के बड़े त्योहार आते हैं, तभी कुछ न कुछ ऐसा नया मुद्दा उठाया जाता है जो समाज में तनाव फैलाए। यह महज़ इत्तेफ़ाक़ नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी चाल लगती है।

मक़सद साफ़ है

लेकिन इस बार तस्वीर अलग है।
हिंदू समाज अब चुप रहने वाला नहीं है। हम शांति से, मगर पूरी ताक़त के साथ जवाब दे रहे हैं “I Love Mahadev”, “I Love Ram” जैसे अभियानों से। यह सिर्फ नारे नहीं हैं, यह हमारी आस्था और पहचान का प्रतीक हैं। यह संदेश हैं कि हम अपनी जड़ों पर गर्व करते हैं और अब किसी भी कीमत पर उन्हें दबने नहीं देंगे।

मेरी नज़र में सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है कि इस तरह के प्रयोगों को नज़रअंदाज़ न करें।

और सबसे ज़रूरी हमें हमेशा याद रखना होगा कि भारत की आत्मा सनातन धर्म है। जब तक सनातन मज़बूत है, तब तक भारत भी मज़बूत रहेगा।

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