February 4, 2026
दीवाली 2025: प्रकाश का पर्व और इसका महत्व | Desi Radar

दीवाली 2025: प्रकाश का पर्व और इसका महत्व

प्रकाशित: 19 अक्टूबर 2025

दीवाली के दीये और रंगोली

एक हिंदू के रूप में, दीवाली मेरे लिए सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि जीवन, प्रकाश और अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक है। दीवाली, जिसे दीपावली भी कहते हैं, हिंदू धर्म का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है, जिसका अर्थ है "दीपों की पंक्ति"। यह भारत और विश्व भर में लाखों लोगों द्वारा मनाया जाता है। यह त्योहार हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार कार्तिक मास की अमावस्या को, आमतौर पर अक्टूबर या नवंबर में आता है। उदाहरण के लिए, 2025 में यह 20 अक्टूबर के आसपास मनाया जाएगा, हालांकि क्षेत्रीय परंपराओं के आधार पर तारीख में थोड़ा अंतर हो सकता है। मेरे लिए, दीवाली नवीकरण, परिवार के साथ समय बिताने और आध्यात्मिक चिंतन का अवसर है, जो हमें हमारी जड़ों और समुदाय को एकजुट करने वाले मूल्यों की याद दिलाता है।

दीवाली का पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व

दीवाली का मूल आधार भगवान राम, उनकी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण की 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या वापसी और राक्षस राजा रावण पर उनकी जीत का उत्सव है। रामायण की यह कहानी धार्मिकता (धर्म) की अधर्म पर, प्रकाश की अंधकार पर और ज्ञान की अज्ञानता पर जीत का प्रतीक है। लोगों ने राम के स्वागत में मिट्टी के दीये जलाए थे, और यह परंपरा आज भी जारी है, जब हम अपने घरों को दीयों और रोशनी से सजाते हैं।

इसके अलावा, दीवाली के अलग-अलग क्षेत्रों में विभिन्न कहानियाँ और मान्यताएँ जुड़ी हैं। दक्षिण भारत में, यह भगवान कृष्ण की नरकासुर पर जीत का प्रतीक है। बंगाल में, माँ काली की पूजा दीवाली के साथ जोड़ी जाती है। जैन धर्म में, यह भगवान महावीर के निर्वाण प्राप्ति का उत्सव है, जबकि सिख समुदाय के लिए यह गुरु हरगोबिंद जी की रिहाई और बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाया जाता है। ये विविध कथाएँ दीवाली को एक समावेशी और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध त्योहार बनाती हैं।

दीवाली की परंपराएँ और उत्सव

दीवाली की तैयारी कई दिनों पहले शुरू हो जाती है। घरों की साफ-सफाई, रंगोली बनाना, नए कपड़े खरीदना और मिठाइयाँ तैयार करना इस पर्व का अभिन्न हिस्सा है। मेरे लिए, घर को सजाने और दीये जलाने का अनुभव आत्मा को शांति देता है। दीवाली की रात को, हम लक्ष्मी-गणेश पूजा करते हैं, क्योंकि माँ लक्ष्मी धन और समृद्धि की देवी हैं, और भगवान गणेश विघ्नहर्ता हैं। पूजा के बाद, परिवार और दोस्त मिठाइयाँ और उपहार बाँटते हैं, जो आपसी प्रेम और भाईचारे को बढ़ाता है।

रंगोली बनाना मेरे लिए विशेष रूप से आनंददायक है। रंगों और फूलों से बनी रंगोली न केवल घर को सुंदर बनाती है, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का भी प्रतीक है। इसके अलावा, दीवाली का भोजन, जैसे लड्डू, बर्फी, और विभिन्न पकवान, इस त्योहार को और भी खास बनाते हैं। मेरे परिवार में, हम सभी मिलकर खाना बनाते हैं, और यह एकजुटता का अनुभव मेरे लिए अमूल्य है।

पटाखों पर प्रतिबंध और मेरे विचार

हाल के वर्षों में, दीवाली के दौरान पटाखों पर प्रतिबंध या "ना यह, ना वह" जैसे बयानों ने मुझे थोड़ा उदास किया है। एक हिंदू के रूप में, मैं समझता हूँ कि दीवाली का उत्साह और उमंग अधूरा सा लगता है जब हम अपनी परंपराओं को पूरी तरह से जी नहीं पाते। पटाखे दीवाली का एक हिस्सा रहे हैं, जो उत्सव की खुशी को बढ़ाते हैं और बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लाते हैं। मुझे याद है कि बचपन में अनार, फुलझड़ियाँ और रॉकेट जलाने का उत्साह कितना खास था। यह न केवल मनोरंजन था, बल्कि परिवार और पड़ोसियों के साथ मिलकर आनंद लेने का एक तरीका था।

हालांकि, मैं पर्यावरण और स्वास्थ्य के प्रति चिंताओं को भी समझता हूँ। प्रदूषण और शोर के कारण पटाखों पर सवाल उठते हैं, और यह चिंता वाजिब है। लेकिन मुझे लगता है कि इसके बजाय पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के, हमें संतुलित समाधान ढूंढने चाहिए, जैसे हरे-भरे पटाखे जो कम प्रदूषण फैलाते हैं। मेरे लिए, यह दुखद है जब लोग दीवाली को सिर्फ प्रदूषण से जोड़कर देखते हैं और इसकी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गहराई को नजरअंदाज करते हैं। यह त्योहार केवल पटाखों के बारे में नहीं है; यह प्रेम, एकता और आशा का उत्सव है।

मुझे लगता है कि हमें अपनी परंपराओं का सम्मान करते हुए पर्यावरण की रक्षा के लिए भी कदम उठाने चाहिए। उदाहरण के लिए, दीयों और बिजली की लड़ियों से सजावट, सामुदायिक उत्सव, और कम प्रदूषण वाले विकल्प अपनाने से हम दीवाली की भावना को जीवित रख सकते हैं। जब लोग "ना यह, ना वह" कहते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे वे हमारे उत्सव की खुशी को कम करने की कोशिश कर रहे हैं। मैं चाहता हूँ कि लोग दीवाली के सच्चे अर्थ को समझें और इसे एकजुट होकर मनाएँ।

दीवाली का आर्थिक महत्व: सभी धर्मों और वर्गों के लिए अवसर

दीवाली न केवल आध्यात्मिक और सांस्कृतिक त्योहार है, बल्कि यह भारत की अर्थव्यवस्था को भी रोशन करता है। यह पर्व सभी धर्मों और वर्गों के लोगों के लिए कमाई का बड़ा अवसर लेकर आता है, विशेष रूप से छोटे कारीगरों, विक्रेताओं और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए। दीवाली के दौरान उपभोक्ता खर्च में भारी वृद्धि होती है, जो कुल खुदरा बिक्री का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा बन जाता है। 2023 में अकेले दीवाली खरीदारी ने अर्थव्यवस्था में लगभग 3.75 लाख करोड़ रुपये का योगदान दिया था, और 2025 में भी यह ट्रेंड जारी रहने की उम्मीद है। यह उत्सव हिंदू, जैन, सिख और अन्य समुदायों के अलावा सभी वर्गों को लाभ पहुँचाता है, क्योंकि इसमें सामान और सेवाओं की माँग सभी के लिए बढ़ जाती है।

इस अवसर पर विभिन्न समुदायों और वर्गों के लोग अच्छा पैसा कमाते हैं। कुम्हार समुदाय, जो मिट्टी के दीये, मूर्तियाँ और मटके बनाते हैं, के लिए यह वर्ष का सबसे व्यस्त समय होता है। कुम्हारवाड़ा जैसे इलाकों में छोटे विक्रेता मिट्टी के दीयों और मूर्तियों की बिक्री से अपनी सालाना आय का बड़ा हिस्सा कमा लेते हैं। कई कुम्हार परिवारों की कमाई दोगुनी हो जाती है, क्योंकि लोग घर सजाने के लिए पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों को प्राथमिकता देते हैं। इसी तरह, झाड़ू बनाने वाले कारीगर, जो दीवाली से पहले घर की सफाई के लिए विशेष झाड़ू तैयार करते हैं, बाजार में अच्छी माँग का सामना करते हैं। ये झाड़ू न केवल सस्ते होते हैं, बल्कि पर्यावरण अनुकूल भी, जिससे इनकी बिक्री बढ़ जाती है।

बर्तन विक्रेता, जो स्टील के थालियाँ, कटोरी और पूजा के लिए बर्तन बेचते हैं, भी इस मौके पर फायदा उठाते हैं। परिवार पूजा और भोजन के लिए नए बर्तन खरीदते हैं, जिससे इन विक्रेताओं की बिक्री में 20-30 प्रतिशत की वृद्धि होती है। पटाखे बेचने वाले व्यापारी के लिए तो दीवाली सोने की खान साबित होती है। हालाँकि पर्यावरण नियमों के कारण कुछ प्रतिबंध हैं, लेकिन हरे पटाखों की माँग बढ़ने से ये विक्रेता अच्छी कमाई करते हैं। बच्चों और युवाओं की खुशी के लिए ये पटाखे उत्सव का अभिन्न अंग बने रहते हैं।

फल विक्रेता, मिठाई दुकानदार, फूल-माला बेचने वाले और सब्जी वाले भी इस पर्व से लाभान्वित होते हैं। फल और फूल पूजा के लिए अनिवार्य होते हैं, जबकि मिठाइयाँ तो दीवाली का प्रतीक हैं। मिठाई की कीमतें जीएसटी में 7-8 प्रतिशत की कमी के कारण और आकर्षक हो गई हैं, जिससे बिक्री में इजाफा हुआ है। फूल माला बनाने वाले, विशेष रूप से महिलाएँ, घर-घर जाकर बेचकर अच्छी आय कमाते हैं। ये सभी असंगठित क्षेत्र के लोग हैं, जो साल भर इंतजार करते हैं इस मौके का। दीवाली के दौरान इनकी आय में 50 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है, जो उनके परिवारों को आर्थिक स्थिरता प्रदान करती है।

ये सभी वर्ग न केवल हिंदू समुदाय से हैं, बल्कि मुस्लिम फल विक्रेता, ईसाई मिठाई बनाने वाले या अन्य धर्मों के कारीगर भी इसमें शामिल होते हैं। दीवाली सभी के लिए एक समान अवसर है, जो सामाजिक एकता को भी मजबूत करता है।

सरकार को होने वाले लाभ

दीवाली सरकार के लिए भी आर्थिक वरदान साबित होती है। जीएसटी संग्रह में भारी वृद्धि होती है, क्योंकि उपभोक्ता खर्च बढ़ने से कर राजस्व बढ़ जाता है। 18 प्रतिशत की जीएसटी दर कुल संग्रह का 65 प्रतिशत हिस्सा बनाती है, और दीवाली के दौरान यह और अधिक हो जाता है। सितंबर-अक्टूबर में जीएसटी संग्रह में 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, और 2025 में नई जीएसटी सुधारों (जैसे 12 प्रतिशत स्लैब को 5 प्रतिशत में स्थानांतरित करना) से यह लाभ और बढ़ेगा। सरकार को लगभग 48,000 करोड़ रुपये का वार्षिक राजस्व लाभ होने की उम्मीद है।

ये संग्रह शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और कल्याण योजनाओं में निवेश के लिए उपयोग होते हैं। इसके अलावा, रोजगार सृजन से बेरोजगारी कम होती है, और पर्यटन में वृद्धि से विदेशी मुद्रा आती है। जीएसटी 2.0 ने छोटे व्यवसायों को औपचारिक बनाया है, जिससे कर अनुपालन बढ़ा और अर्थव्यवस्था मजबूत हुई। कुल मिलाकर, दीवाली सरकार को आर्थिक स्थिरता प्रदान करती है, जो सभी नागरिकों के कल्याण के लिए आवश्यक है।

दीवाली का सामाजिक और आध्यात्मिक महत्व

दीवाली सिर्फ एक धार्मिक त्योहार नहीं है; यह सामाजिक और आध्यात्मिक एकता का प्रतीक है। यह हमें सिखाता है कि हमें अपने अंदर और बाहर के अंधकार को दूर करना है। यह वह समय है जब हम अपने मन की नकारात्मकता, जैसे क्रोध, ईर्ष्या, और लालच, को छोड़कर प्रेम और दया को अपनाते हैं। सामाजिक रूप से, दीवाली हमें अपने पड़ोसियों, दोस्तों और जरूरतमंदों के साथ खुशियाँ बाँटने का अवसर देता है। मैं हर साल अपने परिवार के साथ मिलकर गरीबों को मिठाइयाँ और कपड़े बाँटता हूँ, और यह अनुभव मेरे लिए बहुत सुखदायी होता है।

निष्कर्ष: दीवाली की पुकार

दीवाली मेरे लिए एक ऐसा त्योहार है जो मेरे हिंदू होने की पहचान को मजबूत करता है। यह मेरे परिवार, मेरी संस्कृति और मेरे विश्वासों से मेरे गहरे जुड़ाव को दर्शाता है। पटाखों पर प्रतिबंध या "ना यह, ना वह" जैसे बयानों से थोड़ा दुख होता है, लेकिन मैं मानता हूँ कि हमें अपनी परंपराओं को समय के साथ ढालना होगा ताकि हम पर्यावरण और समाज दोनों का ख्याल रख सकें। दीवाली का असली मोल उस प्रकाश में है जो हम अपने और दूसरों के जीवन में लाते हैं। यह वह समय है जब हम अपने घरों को दीयों से और अपने दिलों को प्रेम से रोशन करते हैं। मेरे लिए, दीवाली हर साल एक नई शुरुआत का प्रतीक है, और मैं चाहता हूँ कि हर कोई इस त्योहार की खुशी को पूरे उत्साह के साथ मनाए।

आइए, इस दीवाली हम सब मिलकर अपने घरों और दिलों को रोशनी से भर दें, और एक-दूसरे के साथ प्रेम और सौहार्द का संदेश बाँटें। शुभ दीवाली!

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